Friday, November 19, 2010
माता कुमाता नहीं हो सकती .
विश्वनाथ भाटी ,तारानगर.
Monday, November 15, 2010
बेवफा
लघुकथा
बेवफा
एक बार एक चिड़े ने चिड़ी से कहा,"मैं तुमसे कभी दूर नहीं होना चाहता हूँ. तुम मुझे छोड़कर कहीं उड़ मत जाना."
एक दिन जोरदार तूफ़ान उमड़ा.चिड़िया ने कहा,"मैं तो उड़ नहीं सकती पर तुम तो उड़ कर अपने प्राण बचा लो."
प्रस्तुति -विश्वनाथ भाटी ,तारानगर ९४१३८८८२०९
Saturday, November 13, 2010
माँ
माँ ने जन्म दिया,
रचयिता- विश्वनाथ भाटी,तारानगर
Tuesday, November 2, 2010
आतिशबाजी
Wednesday, October 13, 2010
शुभ-शुभ बोलो
Saturday, October 9, 2010
सिंचोगे शंकर,बगीचा खिलेगा.
सिंचोगे शंकर,बगीचा खिलेगा.
Friday, October 1, 2010
आदरणीय पिताजी
प्रतियोगिता
विश्वनाथ भाटी ,तारानगर,चुरू
Thursday, September 23, 2010
kuchh naya
Tuesday, September 21, 2010
getting a friend
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WHAT IS THE DIFFERENCE BETWEEN YOUR AND MY SMILE?
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BELIEVE WHERE OTHERS DOUBT,
WORK WHERE OTHERS REFUSE,
DARE TO BE DIFFERENT...!!
YOU WILL A WINNER.
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Friday, August 20, 2010
वो पल
Don't worry if others do not underrstand you.Worry if you cann't understand yourself.
Locks are never manufactured without a key.Similarly God never gives problems without solutions.All we need is to have patience to unlock them.
पूरी दुनिया की सबसे खूबसूरत जोडी;;;; मुस्कराहट और आंसू
दोनों का एक साथ मिलना मुश्किल है लेकिन जब ये दोनों मिलते हैं तो वो पल सबसे खूबसूरत होता है।
GIRL
A girl is like a bird....
God's most prettiest creation in the world....
The childhood of girls is their golden age...
After that ,the world keeps them in a beautiful cage...
This innocent creature,looks like a fairy,
Who losses her feather when she marries...
She leads all her life in serving others..

She also has a heart ,But none bothers..
A dress of happiness and pleasure she wears..
But in every corner ,you find a girl shedding tears....
TRY TO GIVE GIRLS THE DUE RESPECT THAT THEY DESERVE....
तब नैना कछु और थे अब नैना कछु और
Thursday, August 19, 2010
आजकल
प्रशंसा
बॉस की झूठी प्रशंसा करते जीभ कांपती क्यों नहीं
जब जरुरत हो तो चूक जाते हैं
फिर से सोचें
Monday, August 9, 2010
Sunday, August 1, 2010
संविधान द्वारा मान्यता
Tuesday, June 29, 2010
Friday, June 11, 2010
hello
लेकिन आप किस विषय में बात करना चाहते हैं?
वो सब मैं मिलने पर बता दूंगा.
फिर भी कुछ ....[फोन कट गया ] ऐसा कोई फोन आपके पास भी आया होगा.इसके बाद क्या होता है,बताने की जरुरत नहीं.कोई आता है.साथ में एक-दो अंडर सेट्टिंग आदमी भी है.बड़ी-बड़ी बातें,एक पेपर पर प्लान बताया जाता है.आपको कुछ नहीं करना,घर बैठे ढेर सा पैसा, सपने,हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क का अंतर आदि-आदि.
इसके बाद मेम्बर बनाओ,मै तो फंस गया अब दो-तीन और बन जाये तो मेरे मेरे तो आ जाये.चार माह बाद उसी का फोन आता है.मैंने वो पहले वाला बंद कर दिया.अब उस से भी शानदार प्लान आया है. नित नए प्लान ,नित नए फोन.क्या आप कभी इनसे दो-चार हुए हैं?
Friday, June 4, 2010
मुक्त हंसी
इन दिनों यह मुक्त हंसी विलुप्त होने की तरफ अग्रसर है. किसी को वक़्त नहीं इसके लिए. आओ बचपन को कुंठित होने से बचाएं.
Wednesday, May 12, 2010
पशुपालन

इन दिनों क्या आपने ध्यान दिया कि दूध के लिए पशुपालन से लोग कतराते हैं। कुछ हद तक सही भी है ,क्योंकि पशुपालन करना बहुत मुश्किल हो गया है। उनके लिए चारे की समस्या सबसे मोटी है। क्या करना है पशु रख कर। दूध मोल ले लेंगे । रोजाना की दूध की बन्धीवाला आधा किलो दूध अतिरिक्त नहीं दे सकता। फिर विवाह शादी में जितना मर्जी दूध,मावा,छन्ना कहाँ से आजाता है। आये दिन सिंथेटिक दूध के समाचार जानने को मिलते रहते हैं। क्या इस तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए?बेचारी गाय दर दर की मोहताज़ हो गयी।आओ कुछ सकारात्मक कदम उठायें.
Monday, May 10, 2010
चिट्ठी बापू को
Sunday, May 9, 2010
vichar
1.Good heart & good nature are two different things.Good heart can win many relationships but good nature can sustain lifelong relationship.
2.Good things come to those who wait.
Better things come to those who Try.
Best things come to those who Believe in their efforts.
3.Life is like a mirror.What we put into it ,comes back to us.-perhaps more never less.
4.Always care extra care of three thingsin life:
#Trust #promise #Relation
Because they don't make noise when break.
5.Small minds talk about results.
Average mind talk about business.
Great minds talk about growth but Champions never talk;They just perform and the World talk.
Saturday, May 8, 2010
वह मेरा भगवान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
भाई भी बहनों को भूला ,बहनें भूली भाई को,
स्वार्थ की चक्की में पिसकरबच्चे भूले माई को,
पैसों की पर्तों में लिपटे रिश्तों की पहचान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
सच्चाई का गला घोंटकर बढ़ा झूठ का मान यहाँ,
इंसानों का मोल घटा है,बिकता रोज ईमान यहाँ,
सच्ची बातें सुन ने वाले बचे यहाँ पर कान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
khadi ro रही आज द्रौपदी,पर किसना की खबर नहीं है,
पांडव बनकर सब कुछ देदो,दुर्योधन को सब्र नहीं है,
भीष्म बने अन्याय गटक लो,गांडीव सूना,बाण नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
जाति,मज़हब ,उंच-नीच ने ,कतरा-कतरा इन्सान बांटा ,
सर गिन लो ,गिनते जाओगे ,पर सब पर छाया सन्नाटा,
लाशें ही लाशें दिखती हैं,मगर किसी में जान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
बची हुई है इक चिंगारी ,दिल के कोई कोने में,
पा कर पवन पुनः सुलगेगी ,जोश भरेगी बौंने में,
दिल की बातें जिन्दा दिल से ,मुर्दों पर अरमान नहीं नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं हैं॥
विश्वनाथ भाटी,तारानगर,चुरू,राजस्थान। ३३१३०४ ०९४१३८८८२०९ ,01561-240973
तीर्थयात्रा
Friday, May 7, 2010
धर्म और विज्ञान
विज्ञान-हा हा हा ...मै कितना ताकतवर हूँ। आज पूरी दुनिया मेरे चरणों में नत-मस्तक है। चारों तरफ मेरा ही परचम लहरा रहा है।
धर्म -मगर मेरे भाई ,मेरे बिना तुम्हारा क्या मूल्य है?बिना धर्म के विज्ञान अँधा है।
विज्ञान-हा हा हा ही ही ही ...क्या बात करते हो धर्म ;आज तो बस मेरा ही राज है। तुम्हें आज पूछता कौन है?मेरी मानो और किताबों के पन्नों में दुबक कर बैठ जाओ।
धर्म-अरे भाई विज्ञान,इतना अहंकार भी कोई काम का नहीं। धर्मका महत्त्व कभी कम नहीं होता। मैने युगों -युगों से दुनिया को राह दिखाई है।
विज्ञान-राह दिखाई है या लोगों को भीरु बनाया है?राह दिखाने का काम तो मेरा है। मैंने पूरी दुनिया का स्वरुप ही बदल डाला है। आज जिधर देखो उधर विज्ञान ही विज्ञान नजर आता है। धर्म को पूछता कौन है मेरे भाई।
धर्म-मैंने लोगों को सोचना सिखाया,कल्याण का मार्ग दिखाया,दया,करुणा आदि मूल्य सिखाये।
विज्ञान-कल्याण!अरे भाई धर्म तुम्हें जरूर गलतफहमी हुई है। कल्याण तो सारा विज्ञान ने किया है। आज यातायात,चिकित्सा,संचार,खान-पान आदि सभी कुछ तो मेरी देन है।
धर्म-और परमाणु बम भी तो तुम्ही ने दिया है। तुम देते जरूर हो मगर तुम्हारे पास जो सबसे बड़ी कमी है वो है विवेक की कमी।तुम लोगों को भौतिक रूप से समृद्ध कर दोगे किन्तु मानवीय मूल्य तो धर्म ही दे सकता है।
विज्ञान-क्यों इतराते हो?आज मानवीय मूल्यों को पूछता कौन है?
धर्म-मत पूछो,मुझे क्या। नहीं पूछने का परिणाम तो तुम देख ही रहे होंगे। आज चारों ओर हिंसा,मारकाट,बलात्कार,लूट आदि इन्ही मूल्यों के घटने का परिणाम है।और धर्म ही इसकी दिशा बदल सकता है।
विज्ञान-शायद तुम्हारी बात ठीक हो पर आज आदमी के पास इन सब फालतू की बातों के लिए वक़्त नहीं है।
धर्म-भाई विज्ञान,जरा ठण्डे दिमाग से सोचो। तुमने परमाणु के बम तो बना दिए,पर यदि किसी दिन इनका उपयोग हो गया तो .....तो क्या होगा?सोचा है कभी?फिर जब सारी दुनिया ही मिट गयी तो कौन राजा और कौन प्रजा?
विज्ञान-फिर तुम्ही बताओ मुझे क्या करना चाहिए?
धर्म-तुम निराश मत हो ओ । मेरे साथ हाथ मिलाओ। हम दोनों मिलकर मानवता को बचा सकते हैं। [विज्ञान आगे बढ़ता है,धर्म के साथ हाथ मिलाता है। ]
धर्म और विज्ञान-[एक साथ]हम दोनों साथ मिलकर मानवता की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। आओ मनुष्यों हमारे साथ मिलकर इस पुनीत संकल्प को सफल बनाओ।
[धीरे -धीरे पर्दा गिरता है.]
विचारक शिव खेडा ने कहा है कि "जीतनेवाले कोई अलग काम नहीं करतें बल्कि वे हर काम को अलग ढंग से करते हैं।"जीतना सभी चाहते हैं,मगर जीत का मूल्य चुकाने के लिए कितने तैयार रहते हैं?वर्तमान सन्दर्भ में व्यक्ति के सामाजिक दृष्टिकोण में बहुत बदलाव आया है। घर कि नारी अर्थ कि दौड़ में जुड़ गयी है। कलदार कि खनक ने उसे भ्रम के भंवर में धकेल दिया है। मिटटी का दीया धरती से ही नफरत करने लगा।जीत कि हौड ने नारी को दहलीज़ से पराया बना डाला।
दिल की गहराईओं में डूब जाने की जरूरत है,
कितना मज़बूत है ईमान ,आजमाने की जरूरत है,
दुनिया को बदलने की चाह रखने वालो ,सुन लो,
गिरेबान में तो देखो,बदल जाने की जरूरत है।
रिश्तों की पहचान संवेदना में होती है,लेकिन आज रिश्ते भी बोझ बन गए हैं। दुनियाभर का वज़न लादे हम लोग रिश्तों का बोझ उठाने में थक से जाते हैं और जीवन बोझिल हो जाता हैं। दहलीज़ की परवाह छोड़ देने से अर्थ तो मज़बूत बन गया परन्तु रिश्ते दम तोड़ने लगे। यह हमारी जीत नहीं,करारी हर है। हम जीत का सफ़र दहलीज़ से ही शुरू करेंआशीष देने को तरसते हाथों को पैसो की नहीं,झुके हुए सिरों की जरूरत है।टूटे हुए दिलों में प्यार नहीं ठहरता।दहलीज़ की बगिया प्यार के फूलों से ही सुसज्जित होगी।
ख्वाहिशों की दौड़ में हम भावनाओं की मिठास ही खो बैठे।
ख्वाहिश ऐसी करो कि आसमां तक जा सको,
दुआ ऐसी करो कि खुदा को पा सको,
यूँ तो जीने के लिए पल बहुत कम है,
पर जीयो ऐसे कि हर पल में जिन्दगी को पा सको।
दिल जीतनेवाले तलवार वालो पर राज करते हैं। रिश्तों कि मिठास को पहचान कर ही दहलीज़ का मान रखा जा सकता हैं। घर के बड़े -छोटो को दी गयी इज्ज़त कई गुना बढ़कर वापस मिलती है। अर्थ की दौड़ में अनर्थ ना हो यही मनुष्यता की आवश्यकता है। जो दहलीज़ जीत गया ,संसार उसका है।दुनिया का सबसे बड़ा नुकसान वो है जो हमारी वजह से किसी की आँख में आंसू है। सबसे बड़ी उपलब्द्धि वो है जो किसी की आँख में आंसू हमारे लिए।
Thursday, May 6, 2010
Saturday, May 1, 2010
नमन
कीर्ति सौरभ लुटातेफिर सुमन से खिल गए,
आज कैसा लहलहाता ,चमचमाता यह चमन ,
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन।
आस्था हर श्वांश में थी ,लक्ष्य ले बढ़ते कदम
बेड़िया लाख मात तेरी ,प्राण -अंतर में घुटा दम
ऐसी सुसंतान पा कर मुस्कराया यह वतन ।
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन।
प्राण का दीपक जलाया ,आरती कण -कण सजी
माते तुम्हारी वंदना में ,श्वांश की झांझर बजी
बल दो की अर्पण कर सकूँ ,चरणों में तेरे सर सुमन ।
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन ।
विश्वनाथ भाटी,तारानगर ,चुरू
Friday, April 30, 2010
काम और समय
विश्वनाथ भाटी ,तारानगर ९४१३८८८२०९
Friday, April 16, 2010
कविता
तेरे लिए कहते,सुनते
खरी या खोटी ,
वाह री रोटी।
२
मम्मी की झिडकी
बेचारी लड़की
३
लंका
सोने की थी
तभी तो
कुम्भकरण जैसे लोग
सोये रहते थे।
४
क्या कहूँ मैं
इस कमी को
पी रही है शराब
आदमी को।










