Friday, November 19, 2010

माता कुमाता नहीं हो सकती .

                    एक माता-पिता ८-१० पुत्रों का पालन-पोषण करके भी चेहरे पर शिकन नहीं लाते मगर ८-१० पुत्र मिलकर भी माँ-बाप की सेवा नहीं कर पाते.संतान के लिए माँ-बाप भार क्यों बन जाते हैं? क्या माँगते हैं ये. बस प्यार के दो बोल.जरा से प्यार से बोल दो,पिघल जायेंगे.उनके दिल को जीतने का प्रयास करें तो दुनिया की सारी खुशियाँ आपकी झोली में होंगी.माँ-बाप समस्त तीर्थों से बढकर हैं.पूत कपूत हो सकता है मगर माता कुमाता नहीं हो सकती .
                                                                                   विश्वनाथ भाटी ,तारानगर.

Monday, November 15, 2010

               Why students fail in the the Exam?
_8 hours of sleep eachday =122 Days ;365-122=243 Days
_ Summer Holidays =61 Days  ;243-61 = 182 Days
_ Sundays in a Year = 52 days ;182-52 = 130 Days
_ Festival Holidays = 40 Days  ;130-40 = 90 Days
_ 3 Hours of daily playing = 46 Days  ;90-46 = 44 Days
_ Winter Holidays = 15 Days  ;44-15 = 29 Days
_ 1 hour per day for mobile & entertainment =15 Days  ;29-15 = 14 Days
_ Sickness  = 10 Days  ;14-10 = 4 days
_ Film,T.V. etc. in a year = 3 Days
_ Remaining 1 day is his/her Birthday,No study mood.Birthday enjoy......

बेवफा

      
लघुकथा



                                                     बेवफा 
     एक बार एक चिड़े ने चिड़ी से कहा,"मैं तुमसे कभी दूर नहीं होना चाहता हूँ. तुम मुझे छोड़कर कहीं उड़ मत जाना."
चिड़ी बोली,"यदि उड़ जाऊं तो तुम मुझे पकड़ लेना."
"पकड़ तो तुम्हे लूँगा मगर  इस तरह   मैं तुम्हें पा नहीं सकता."चिड़े ने रुआंसा होते हुए कहा.
तभी चिड़िया ने अपने सभी पंख नोच डाले और बोली,"लो अब मैं तुम्हारी हो चुकी.अब मैं कभी तुम्हें छोड़कर नहीं जा सकती." 
एक दिन जोरदार तूफ़ान उमड़ा.चिड़िया ने कहा,"मैं तो उड़ नहीं सकती पर तुम तो उड़ कर अपने प्राण बचा लो."
चिड़ा बोला ,"ठीक है,मगर तुम अपना ख़याल रखना." कहा कर वह उड़ गया.
तूफ़ान रुकने के बाद उसने आकर देखा ,चिड़िया मर चुकी थी.
वृक्ष की एक डाली पर खून से लिखा था,"काश!वो एक बार तो कहता कि मैं तुम्हें अकेली छोड़कर नहीं जा सकता.यदि वह ऐसा कर लेता तो कम से कम मैं तूफ़ान आने से पहले तो नहीं मरती."
                                                                                 प्रस्तुति  -विश्वनाथ भाटी ,तारानगर ९४१३८८८२०९






Saturday, November 13, 2010

माँ

                               माँ  
माँ ने जन्म दिया,
पाला-पोसा ,
माँ ने खुद गीले में सो कर सूखे में सुलाया,
माँ ने तुतला-तुतला कर बोलना सिखाया,
माँ ने डगमगाते कदमों को उंगली का सहारा दिया,
माँ ने रात-रातभर जागकर हमारी नींद को संजोया ,
माँ ने आँचल की ओट से दुनिया के ह बुरे साये को दूर रखा,
माँ ने बहू-बेटे की आरती उतारी,
बेटा अपनी दुनिया में खो गया,
समझदार जो हो गया है,
तरस गयी ममता, 
बरस गयी आँखे,
नहीं है समय जीवनदात्री के लिए,
व्यापार भी तो करना है .
माँ दिल से सोचती है,
बेटा दिमाग से.
                           रचयिता-      विश्वनाथ भाटी,तारानगर

Tuesday, November 2, 2010

आतिशबाजी

इन दिनों आतिशबाजी का प्रचलन बहुत बढ़ता जा रहा है.आज हमें पर्यावरण के लिहाज से सोचना चाहिए कि इस से हमारे पर्यावरण को कितना नुकशान हो रहा है. थोड़े से आनंद के लिए ढेर सा पैसा और कितना सारा प्रदूषण समाज को मिल रहा है. हमें थोडा विचार करके इस दूषित परंपरा को बंद करना चाहिए.

Wednesday, October 13, 2010

शुभ-शुभ बोलो

                         व्यक्ति जैसा सोचता और करता है वह वैसा ही बन जाता है.हमारा अवचेतन मन हमारे द्वारा सोचे गये ,बोले गये ,देखे गये  को अपने भीतर जमा करता रहता है.यदि बुरा बोला तो बुराई जमा हुई और अच्छा बोला बोला तो अच्छाई जमा होगी.अवचेतन मन सोचने का काम खुद नहीं करता . हमारे द्वारा भरी गयी समस्त सूचनाएँ ही उसका आधार बनती है.हम चाहते तो कुछ और है मगर अवचेतन मन को देने वाली सूचनाओं की तरफ से बेखबर रहते हैं.इसी बात के कारण हमारे बड़े-बुजुर्ग सदा से यही कहते रहें है कि "सदा शुभ-शुभ बोलो ."आओ विचार करें कि हमारे द्वारा बोला गया हर वाक्य हरबार सकारात्मक ही हो.

Saturday, October 9, 2010

सिंचोगे शंकर,बगीचा खिलेगा.

वर्ष १९९०-९१ .मैं सरदारशहर  में बी.एड .कर रहा था.आर्थिक तंगी के दिन थे .जेब में सिर्फ ७.५० रूपये थे .अर्जुन कलब की ढलान पर मेरी बिना ब्रेक की साईकिल आगे बढ़ रही थी.साईकिल की घंटी को सुना अनसुना करके चाय की दुकान पर काम करनेवाला एक लड़का चला जा रहा था.बचाते-बचाते आगे का पहिया उसके हाथ के छींके से जा टकराया.चटक,चटक,चटक...तीन गिलाश टूट गये.मैंने बिगड़ते हुए कहा सुनाई नहीं देता क्या?लड़का बोला ,"साहब,साढ़े चार रूपये दे दीजिये ,तीन गिलाश टूट गये हैं."
"क्या कहा!साढ़े चार दे दूँ?हराम में आते हैं क्या?गलती तुम्हारी है.एक तरफ चलो और मुड़कर भी देखो,समझे?"
"साहबजी ,मेरी गलती रही होगी मगर मेरा मालिक मुझे बहुत मारेगा.मुझे नौकरी से भी निकल देगा."उसके चेहरे पर करुणा झलक रही थी.मैंने जेब से साढ़े चार रूपये निकल कर उसकी हथेली पर राख दिए.मैं कभी अफशोस तो कभी फकीरी हंसी हंस रहा था.
पहला घंटा बजते-बजते चपरासी ने कक्षा में आकर मेरा नाम पुकारा.डाकिया मेरे नाम ३० रूपये का मनी आर्डर  लिए खड़ा था.शिविरा में छपी रचना का मानदेय था.मैंने प्रभु का धन्यवाद् किया.मेरे मुख से निकला..
                                        जो देगा,दिया है,दिया सो मिलेगा.   
                                             सिंचोगे शंकर,बगीचा खिलेगा.

Friday, October 1, 2010

आदरणीय पिताजी

आदरणीय पिताजी ,
                           आपकी स्मृति में शत-शत नमन.मुझे याद है तब मैं छठी कक्षा का विद्यार्थी था.आपने मुझे पक्का जोहडा बालाजी पर भजन बनाने के लिए प्रेरित किया था.मैंने टूटी-फूटी शुरुआत की और स्कुल में ही एक भजन बनाया.आपकी प्रेरणा से वह मेरी पहली कविता,पहली रचना थी.आज मेरी कविताओं का एक संग्रह चिडपडाट  नाम से प्रकाशित हो चुका है.कविता और गद्य लेखन का क्रम अनवरत चाल रहा है.आप मेरे पिता के साथ-साथ साहित्यिक गुरु भी है.

प्रतियोगिता

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ,राजस्थान द्वारा शिक्षको के लिए आयोजित प्रतियोगिता के अंतर्गत २७ से २९ सितम्बर,२०१० को राजसमन्द में राज्य स्तरीय आयोजन किया गया.सौभाग्य से निबंध लेखन प्रतियोगिता में मेरा स्थान प्रथम रहा.
विश्वनाथ भाटी ,तारानगर,चुरू 

Thursday, September 23, 2010

kuchh naya

अपनायत संस्थान,तारानगर  का शुभारम्भ दिनांक १/९/२०१० को हो गया है. यह संस्था साहित्यिक,सांस्कृतिक,सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए गठित की गयी है.

Tuesday, September 21, 2010

getting a friend

GETTING A FRIEND IS EASY
CHOOSING A FRIEND  IS DIFFICULT,
MAINTAINING A FRIEND IS TALLENT,
CONTINUING THE FRIENDSHIP IS A GREAT GIFT.

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SILENCE BETWEEN TWO UNKNOWN PEOPLE CREATES A LESSON...
BUT ...SILENCE BETWEEN TWO KNOWN PEOPLE BREAKS THE RELATION.
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WHAT IS THE DIFFERENCE BETWEEN YOUR AND MY SMILE?
YOU SMILE WHEN YOU ARE HAPPY
BUT I SMILE WHEN YOU ARE HAPPY.
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BELIEVE WHERE OTHERS DOUBT,
WORK WHERE OTHERS REFUSE,
SAVE WHERE OTHERS WASTE,
STAY WHERE OTHERS QUIT,
DARE TO BE DIFFERENT...!!
YOU WILL A WINNER.
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Friday, August 20, 2010

वो पल

जरुरत के मुताबिक जिन्‍दगी जीयो; ख्‍वाहिश के मुताबिक नहीं क्‍योंकि जरूरत फकीर की भी पूरी हो जाती है मगर ख्‍वाहिश बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है।

Don't worry if others do not underrstand you.Worry if you cann't understand yourself.

Locks are never manufactured without a key.Similarly God never gives problems without solutions.All we need is to have patience to unlock them.
पूरी दुनिया की सबसे खूबसूरत जोडी;;;; मुस्‍कराहट और आंसू 
दोनों का एक साथ मिलना मुश्किल है लेकिन जब ये दोनों मिलते हैं तो वो पल सबसे खूबसूरत होता है।

GIRL

                              GIRL
      A girl is like a bird....
      God's most prettiest creation in the world....
      The childhood of girls is their golden age...
      After that ,the world keeps them in a beautiful cage...
      This innocent creature,looks like a fairy,
      Who losses her feather when she marries...
      She leads all her life in serving others..

      She also has a heart ,But none bothers..
      A dress of happiness and pleasure she wears..
      But in every corner ,you find a girl shedding tears....
      TRY TO GIVE GIRLS THE DUE RESPECT THAT THEY DESERVE....

तब नैना कछु और थे अब नैना कछु और

                        समाज में रहते हुए अनेक बार अपनी जरूरत के लिए दूसरों क‍ी मदद लेनी पडती है। रही बात रुपयों पैसों के लेनदेन की सो अधिक पैसेवाला हो या कम पैसोंवाला सबको ही जरुरत पडती रहती है।इस विषय में जो विचारणीय बात है वह यह कि तब नैना कछु और थे अब नैना कछु और अर्थात्‍ा जरुरत पडने और जरुरत पूरी होने के बाद नैन पलट जाते हैं। मेरे भाई साहब ने बताया कि व्‍यवहार कमाना पडता है। लेने के समय किया गया वादा देने के वक्‍त भी याद रहना चाहिए। वादा करते समय अपनी क्षमता का आकलन कर लेना अच्‍छा रहता है। वादे पर खरा उतर कर अपना व्‍यवहार बना रह जाता है। यदि मजबूरी हो भी जाए तो उस व्‍यक्ति को छोडकर बाकी पूरी दुनिया आपके सामने है। इससे उस व्‍यक्ति के सामने हमारा वचन खडा रह जाता है। एक बार आजमा कर तो देख लीजिए।    विश्‍वनाथ भाटी तारानगर

Thursday, August 19, 2010

आजकल

आजकल बच्‍चे मिठाई से कतराते हैं। उन्‍हें चाहिए कुरकुरे भुजिया समोसे या शीतल पेय।एक वो जमाना था जब हमें थोडे से गुड के लिए बहुत पापड बेलने पडते थे। बर्फवाले लच्‍छे के लिए तो कितनी सारी शर्तें भी माननी पडती थीं। दिवाली या होली का बेसब्री से इन्‍तजार करते रहते थे। चीनी के डिब्‍बे से मां की नजरें बचाकर थोडी सी चीनी चुराने में बहुत मजा  आता था। कभी कभी तो शिकायत हो जाने से मजा किरकिरा भी हो जाता था। रसगुल्‍ले के लिए तो कहते थे कि ये चाहे 100 खालो पर पेट तो भरेगा नहीं। जमाना बदल रहा है।

प्रशंसा

प्रशंसा सभी को सुहाती है मगर जब प्रशंसा करने का अवसर आता है तो हम कंजूस क्‍यों बन जाते हैंा जहॉं मौ‍का आये खुले दिल से प्रशंसा कर देनी चाहिए पर झूठी कभी न हो
बॉस की झूठी प्रशंसा करते जीभ कांपती क्‍यों नहीं
पत्‍नी ने बडे प्रेम से आपके लिए सब्‍जी बनाई मगर आपका ध्‍यान तो मोबाइल में था 
बच्‍चा अपनी अंकतालिका दिखाने आया पर हम तो जरुरी फाइल में उलझे थे
जब जरुरत हो तो चूक जाते हैं 
फिर से सोचें

Monday, August 9, 2010

क्षणिकाएं

तेरे लिए कहते सुनते 
खरी या खोटी
वाह री रोटी .
#######
मम्मी की झिडकी 
बेचारी लड़की 
########

Sunday, August 1, 2010

संविधान द्वारा मान्यता

राजस्थान प्रान्त एक बहुत बड़ा राज्य है. राजस्थान के लोग अपनी राजस्थानी भाषा में बोलते हैं. राजस्थानी भाषा की मारवाड़ी,मेवाड़ी,मेवाती,हाडोती आदि बोलियाँ है और विशाल साहित्य भण्डार भरा है, मगर करोड़ों लोगो की इस भाषा को अभी तक संविधान द्वारा मान्यता नहीं दी गयी है. इस भाषा को मान्यता मिलने से राजस्थान के लोगों को अपनी जबान मिल सकेगी.

Friday, June 11, 2010

hello

   हेल्लो-मैं ..... बोल रहा हूँ.मुझे आपसे एक जरुरी मुलाकात करनी है.बताइए आप मुझे कहाँ मिलेंगे?
   लेकिन आप किस विषय में बात करना चाहते हैं?
   वो सब मैं मिलने पर बता दूंगा.
  फिर भी कुछ ....[फोन कट गया ] ऐसा कोई फोन आपके पास भी आया होगा.इसके बाद क्या होता है,बताने की जरुरत नहीं.कोई आता है.साथ में एक-दो अंडर सेट्टिंग आदमी भी है.बड़ी-बड़ी बातें,एक पेपर पर प्लान बताया जाता है.आपको कुछ नहीं करना,घर बैठे ढेर सा पैसा, सपने,हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क का अंतर आदि-आदि.
इसके बाद मेम्बर बनाओ,मै तो फंस गया अब दो-तीन और बन जाये तो मेरे मेरे तो आ जाये.चार माह बाद उसी का फोन आता है.मैंने वो पहले वाला बंद कर दिया.अब उस से भी शानदार प्लान आया है. नित नए प्लान ,नित नए फोन.क्या आप कभी इनसे दो-चार हुए हैं?

Friday, June 4, 2010

मुक्त हंसी


इन दिनों यह मुक्त हंसी विलुप्त होने की तरफ अग्रसर है. किसी को वक़्त नहीं इसके लिए. आओ बचपन को कुंठित होने से बचाएं.

Wednesday, May 12, 2010

पशुपालन


इन दिनों क्या आपने ध्यान दिया कि दूध के लिए पशुपालन से लोग कतराते हैं। कुछ हद तक सही भी है ,क्योंकि पशुपालन करना बहुत मुश्किल हो गया है उनके लिए चारे की समस्या सबसे मोटी है क्या करना है पशु रख कर दूध मोल ले लेंगे रोजाना की दूध की बन्धीवाला आधा किलो दूध अतिरिक्त नहीं दे सकता फिर विवाह शादी में जितना मर्जी दूध,मावा,छन्ना कहाँ से आजाता है आये दिन सिंथेटिक दूध के समाचार जानने को मिलते रहते हैं। क्या इस तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए?बेचारी गाय दर दर की मोहताज़ हो गयी।आओ कुछ सकारात्मक कदम उठायें.

Monday, May 10, 2010

चिट्ठी बापू को

बापू माफ़ करना,मैंने तुम्हे बहुत देर से समझा है। मै कभी तुमसे सहमत नहीं रहा और सदा विरोध करता था। अब समझ में आ रहा है कि तब मेरी समझ का स्तर कितना नीचा था। अभी भी तुम्हें समझने में बहुत समय लगेगा पर संतोष है कि सही दिशा तो मिली। विश्वनाथ भाटी ,तारानगर[चुरू]

Sunday, May 9, 2010

vichar

1.Good heart & good nature are two different things.Good heart can win many relationships but good nature can sustain lifelong relationship.

2.Good things come to those who wait.

Better things come to those who Try.

Best things come to those who Believe in their efforts.

3.Life is like a mirror.What we put into it ,comes back to us.-perhaps more never less.

4.Always care extra care of three thingsin life:

#Trust #promise #Relation

Because they don't make noise when break.

5.Small minds talk about results.

Average mind talk about business.

Great minds talk about growth but Champions never talk;They just perform and the World talk.

Saturday, May 8, 2010

वह मेरा भगवान नहीं है।

जिस पत्थर को पूजा करता वह मेरा भगवान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
भाई भी बहनों को भूला ,बहनें भूली भाई को,
स्वार्थ की चक्की में पिसकरबच्चे भूले माई को,
पैसों की पर्तों में लिपटे रिश्तों की पहचान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
सच्चाई का गला घोंटकर बढ़ा झूठ का मान यहाँ,
इंसानों का मोल घटा है,बिकता रोज ईमान यहाँ,
सच्ची बातें सुन ने वाले बचे यहाँ पर कान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
khadi ro रही आज द्रौपदी,पर किसना की खबर नहीं है,
पांडव बनकर सब कुछ देदो,दुर्योधन को सब्र नहीं है,
भीष्म बने अन्याय गटक लो,गांडीव सूना,बाण नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
जाति,मज़हब ,उंच-नीच ने ,कतरा-कतरा इन्सान बांटा ,
सर गिन लो ,गिनते जाओगे ,पर सब पर छाया सन्नाटा,
लाशें ही लाशें दिखती हैं,मगर किसी में जान नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं है॥
बची हुई है इक चिंगारी ,दिल के कोई कोने में,
पा कर पवन पुनः सुलगेगी ,जोश भरेगी बौंने में,
दिल की बातें जिन्दा दिल से ,मुर्दों पर अरमान नहीं नहीं है।
इंसानों की बस्ती में भी आज कोई इन्सान नहीं हैं॥
विश्वनाथ भाटी,तारानगर,चुरू,राजस्थान। ३३१३०४ ०९४१३८८८२०९ ,01561-240973

तीर्थयात्रा

लघुकथा तीर्थयात्रा *विश्वनाथ भाटी " इस बार इच्छा है कि चारधाम कि यात्रा कर आऊं.सांसों का क्या भरोसा ,कब निकल जाये. "पार्वतीदेवी ने विजयबाबू के समक्ष अपनी बात रखी ."ठीक ही है अगर बेटा करवा रहा है तो कर ही आओ. "विजयबाबू ने अखबार का पन्ना पलटते हुए कहा. "ऐसा क्यों कहते हो,वो आपका बेटा नहीं है क्या ?""बेटा तो क्यों नहीं है मगर मैं उसे तुमसे ज्यादा जानता हूँ. इस बार भी कोई बहाना निकाल लेगा.""आपको भी है ना शक करने की आदत सी पड़ गयी है .पिछली बार तो ऐनमौके पर कंपनी का कामआ गया था वरना उसका तो पक्का पक्का मानस था.""मैं कब रोकता हूँ ,जाओ ना; यदि ले जाता है तो बढ़िया बात ही है""पोस्टमन..."गली में आवाज सुनाई दी .वह दौड़ी दौड़ी सी दरवाजे तक गयी .सुनील का ही ख़त था. उसकी आँखे चमक उठी ."यह लो ,सुनील का ख़त है शायद तीर्थयात्रा का समाचार भेजा हो."पार्वतीदेवी की नज़रें विजयबाबू के चेहरे पर टिक गयी."समाचार तो तीर्थयात्रा का ही है ,मगर किसी और का."विजयबाबू ने चश्मा अख़बार पर रखते हुए कहा. "और किसी का ;क्या मतलब?""लिखा है किअपने सास -ससुर को लेकर चारधाम कि यात्रा पर जा रहा हूँ.इस बार नहीं आ सकता .विचार मत करना .अचानक ही प्रोग्राम बन गया ."पार्वतीदेवी पत्थर बनी खुले पड़े ख़त को देखती जा रही थी. रसोईघर से सब्जी जलने कि गंध आ रही थी. विश्वनाथ भाटी ,वार्ड न ८,पो.तारानगर[चुरू] राजस्थान ०९४१३८८८२०९

Friday, May 7, 2010

धर्म और विज्ञान

[पर्दा खुलता है। मंच पर दो पात्र नज़र आते हैं। एक धर्महै तो दूसरा विज्ञान । विज्ञान के हाथों में मिसाइल है। धर्म के हाथों में ध्वज है। ]
विज्ञान-हा हा हा ...मै कितना ताकतवर हूँ। आज पूरी दुनिया मेरे चरणों में नत-मस्तक है। चारों तरफ मेरा ही परचम लहरा रहा है।
धर्म -मगर मेरे भाई ,मेरे बिना तुम्हारा क्या मूल्य है?बिना धर्म के विज्ञान अँधा है।
विज्ञान-हा हा हा ही ही ही ...क्या बात करते हो धर्म ;आज तो बस मेरा ही राज है। तुम्हें आज पूछता कौन है?मेरी मानो और किताबों के पन्नों में दुबक कर बैठ जाओ।
धर्म-अरे भाई विज्ञान,इतना अहंकार भी कोई काम का नहीं। धर्मका महत्त्व कभी कम नहीं होता। मैने युगों -युगों से दुनिया को राह दिखाई है।
विज्ञान-राह दिखाई है या लोगों को भीरु बनाया है?राह दिखाने का काम तो मेरा है। मैंने पूरी दुनिया का स्वरुप ही बदल डाला है। आज जिधर देखो उधर विज्ञान ही विज्ञान नजर आता है। धर्म को पूछता कौन है मेरे भाई।
धर्म-मैंने लोगों को सोचना सिखाया,कल्याण का मार्ग दिखाया,दया,करुणा आदि मूल्य सिखाये।
विज्ञान-कल्याण!अरे भाई धर्म तुम्हें जरूर गलतफहमी हुई है। कल्याण तो सारा विज्ञान ने किया है। आज यातायात,चिकित्सा,संचार,खान-पान आदि सभी कुछ तो मेरी देन है।
धर्म-और परमाणु बम भी तो तुम्ही ने दिया है। तुम देते जरूर हो मगर तुम्हारे पास जो सबसे बड़ी कमी है वो है विवेक की कमी।तुम लोगों को भौतिक रूप से समृद्ध कर दोगे किन्तु मानवीय मूल्य तो धर्म ही दे सकता है।
विज्ञान-क्यों इतराते हो?आज मानवीय मूल्यों को पूछता कौन है?
धर्म-मत पूछो,मुझे क्या। नहीं पूछने का परिणाम तो तुम देख ही रहे होंगे। आज चारों ओर हिंसा,मारकाट,बलात्कार,लूट आदि इन्ही मूल्यों के घटने का परिणाम है।और धर्म ही इसकी दिशा बदल सकता है।
विज्ञान-शायद तुम्हारी बात ठीक हो पर आज आदमी के पास इन सब फालतू की बातों के लिए वक़्त नहीं है।
धर्म-भाई विज्ञान,जरा ठण्डे दिमाग से सोचो। तुमने परमाणु के बम तो बना दिए,पर यदि किसी दिन इनका उपयोग हो गया तो .....तो क्या होगा?सोचा है कभी?फिर जब सारी दुनिया ही मिट गयी तो कौन राजा और कौन प्रजा?
विज्ञान-फिर तुम्ही बताओ मुझे क्या करना चाहिए?
धर्म-तुम निराश मत हो ओ । मेरे साथ हाथ मिलाओ। हम दोनों मिलकर मानवता को बचा सकते हैं। [विज्ञान आगे बढ़ता है,धर्म के साथ हाथ मिलाता है। ]
धर्म और विज्ञान-[एक साथ]हम दोनों साथ मिलकर मानवता की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। आओ मनुष्यों हमारे साथ मिलकर इस पुनीत संकल्प को सफल बनाओ।
[धीरे -धीरे पर्दा गिरता है.]
विचारक शिव खेडा ने कहा है कि "जीतने वाले कोई अलग काम नहीं करते बल्कि वे हार काम को अलग ढंग से करते हैं"जीतना सभी चाहते हैं ,मगर जीत का मूल्य चुकाने के लिए कितने तैयार रहते हैं?वर्तमान सन्दर्भ में सामाजिक दृष्टिकोण में बहुत बदलाव आया हैघर की नारी दहलीज़ लांघकर अर्थ की दौड़ में जुड़ गयी हैकलदार की खनक ने उसे भ्रम के भंवर में धकेल दीया हैमिटटी का दीया धरती से ही नफरत करने लगा हैजीत की हौड ने नारी और दहलीज़ के बीच परायेपन की दीवार खींच दी है

दिल की गहराइयों में डूब जाने की जरूरत है,

कितना मज़बूत है ईमान,आजमाने की जरूरत है,

दुनिया को बदलने की चाह रखनेवालों,सुनो,

गिरेबान में तो देखो,बदल जाने की जरूरत है

रिश्तों की जान संवेदना में होती है,लेकिन आज रिश्ते भी बोझ बन गए हैंदुनियाभर का वज़न लादे हम लोग रिश्तों का बोझ उठाने में थक से जाते हैं और जीवन बोझिल हो जाता हैआज दहलीज़ परायी बनती जा रही हैसंवेदना शून्य समाज में अर्थ ही सब कुछ बनता जा रहा हैमगर यह तो देखें कि दिलों की अनदेखी करके अगर जग भी जीता तो क्या जीताजीत की चाह रखना बुरा नहीं पर जीत के लिए आधार को ही भूल जाना चिंता का विषय जरूर है दहलीज़ का प्यार ही संसार की विशालता के दर्शन करवा सकता हैसौदा महंगा भी नहीं। दहलीज़ के बड़े -बूढ़े हाथ पैसों की नहीं झुके; हुए सिरों की चाह रखते हैंजिसने दिल जीतने का हूनर सीख लिया,वह संसार का सबसे बड़ा विजेता हैदिल जीतनेवाले तलवार वालों पर राज करते हैं

इन दिनों दहलीज़ की अनदेखी ने विशेषकर नारी को एक ऐसे गर्त में धकेल दिया है,जहाँ आत्मिक आनंद को कभी नहीं पाया जा सकताजीत के सफ़र की शुरुआत दहलीज़ से ही करेंकहा भी गया है कि दुनिया का सबसे बड़ा नुकसान वो है कि किसी आँखों में आंसू हमारी वजह से दुनिया की सबसे बड़ी उपलब्द्धि यही है कि किसी की आँखों में आंसू हमारे लिए मन के छलावे में आकर आत्मा के आनंद को भुला देना समझदारी नहीं कही जा sakti

विचारक शिव खेडा ने कहा है कि "जीतनेवाले कोई अलग काम नहीं करतें बल्कि वे हर काम को अलग ढंग से करते हैं"जीतना सभी चाहते हैं,मगर जीत का मूल्य चुकाने के लिए कितने तैयार रहते हैं?वर्तमान सन्दर्भ में व्यक्ति के सामाजिक दृष्टिकोण में बहुत बदलाव आया हैघर कि नारी अर्थ कि दौड़ में जुड़ गयी हैकलदार कि खनक ने उसे भ्रम के भंवर में धकेल दिया हैमिटटी का दीया धरती से ही नफरत करने लगाजीत कि हौड ने नारी को दहलीज़ से पराया बना डाला


दिल की गहराईओं में डूब जाने की जरूरत है,


कितना मज़बूत है ईमान ,आजमाने की जरूरत है,


दुनिया को बदलने की चाह रखने वालो ,सुन लो,


गिरेबान में तो देखो,बदल जाने की जरूरत है


रिश्तों की पहचान संवेदना में होती है,लेकिन आज रिश्ते भी बोझ बन गए हैंदुनियाभर का वज़न लादे हम लोग रिश्तों का बोझ उठाने में थक से जाते हैं और जीवन बोझिल हो जाता हैंदहलीज़ की परवाह छोड़ देने से अर्थ तो मज़बूत बन गया परन्तु रिश्ते दम तोड़ने लगेयह हमारी जीत नहीं,करारी हर हैहम जीत का सफ़र दहलीज़ से ही शुरू करेंआशीष देने को तरसते हाथों को पैसो की नहीं,झुके हुए सिरों की जरूरत हैटूटे हुए दिलों में प्यार नहीं ठहरतादहलीज़ की बगिया प्यार के फूलों से ही सुसज्जित होगी


ख्वाहिशों की दौड़ में हम भावनाओं की मिठास ही खो बैठे


ख्वाहिश ऐसी करो कि आसमां तक जा सको,


दुआ ऐसी करो कि खुदा को पा सको,


यूँ तो जीने के लिए पल बहुत कम है,


पर जीयो ऐसे कि हर पल में जिन्दगी को पा सको


दिल जीतनेवाले तलवार वालो पर राज करते हैंरिश्तों कि मिठास को पहचान कर ही दहलीज़ का मान रखा जा सकता हैंघर के बड़े -छोटो को दी गयी इज्ज़त कई गुना बढ़कर वापस मिलती हैअर्थ की दौड़ में अनर्थ ना हो यही मनुष्यता की आवश्यकता हैजो दहलीज़ जीत गया ,संसार उसका हैदुनिया का सबसे बड़ा नुकसान वो है जो हमारी वजह से किसी की आँख में आंसू हैसबसे बड़ी उपलब्द्धि वो है जो किसी की आँख में आंसू हमारे लिए

Thursday, May 6, 2010

Saturday, May 1, 2010

नमन

देश की मिटटी में जन्मे और इसी में मिल गए,
कीर्ति सौरभ लुटातेफिर सुमन से खिल गए,
आज कैसा लहलहाता ,चमचमाता यह चमन ,
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन।
आस्था हर श्वांश में थी ,लक्ष्य ले बढ़ते कदम
बेड़िया लाख मात तेरी ,प्राण -अंतर में घुटा दम
ऐसी सुसंतान पा कर मुस्कराया यह वतन
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन।
प्राण का दीपक जलाया ,आरती कण -कण सजी
माते तुम्हारी वंदना में ,श्वांश की झांझर बजी
बल दो की अर्पण कर सकूँ ,चरणों में तेरे सर सुमन
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन ।
विश्वनाथ भाटी,तारानगर ,चुरू

Friday, April 30, 2010

लघु कविता

विश्व प्रसारण का प्रेमी
प्रेमिका से बोला तुम हो
तितली सी
लगती हो मुझे
बीबीसी.

काम और समय

आदमी को काम कीअधिकता नहीं मारती बल्कि काम की अनियमितता मार डालती है। काम को सही समय पर पूरा करने के लिए समय का नियोजन आना बहुत जरुरी है। चार तरह के काम हमे करने होते हैं। १.वो काम जो हमे ही करने पड़ेंगे ,जैसे -नहाना,सोना,शौच जाना आदि। २.वो काम जो जरुरी हैं जैसे-ड्यूटी पर जाना,बच्चों को स्कूल छोड़नाबीमार होने पर दवाई लेना आदि। ३.तीसरे तरह के काम आदत से जुड़े होते हैं,जैसे टीवी देखना,देर तक सोना । ४.रूचि के काम सिनेमा जाना,क्रिकेट खेलना आदि। जब हम कोई विशेष लक्ष्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं तो एक बार हमें क्रमांक ३ व ४ को स्थगित करना होगा। अपने सबसे अच्छे समय में हम जरुरी और महत्वपूर्ण काम काम पूरे करें। समय का मूल्य समझेंगे तो समय हमारा मूल्य बनाये रखेगा।
विश्वनाथ भाटी ,तारानगर ९४१३८८८२०९

Friday, April 16, 2010

कविता


तेरे लिए कहते,सुनते
खरी या खोटी ,
वाह री रोटी।


मम्मी की झिडकी
बेचारी लड़की

लंका
सोने की थी
तभी तो
कुम्भकरण जैसे लोग
सोये रहते थे

क्या कहूँ मैं
इस कमी को
पी रही है शराब
आदमी को