Friday, October 1, 2010

आदरणीय पिताजी

आदरणीय पिताजी ,
                           आपकी स्मृति में शत-शत नमन.मुझे याद है तब मैं छठी कक्षा का विद्यार्थी था.आपने मुझे पक्का जोहडा बालाजी पर भजन बनाने के लिए प्रेरित किया था.मैंने टूटी-फूटी शुरुआत की और स्कुल में ही एक भजन बनाया.आपकी प्रेरणा से वह मेरी पहली कविता,पहली रचना थी.आज मेरी कविताओं का एक संग्रह चिडपडाट  नाम से प्रकाशित हो चुका है.कविता और गद्य लेखन का क्रम अनवरत चाल रहा है.आप मेरे पिता के साथ-साथ साहित्यिक गुरु भी है.

No comments: