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Friday, May 7, 2010

धर्म और विज्ञान

[पर्दा खुलता है। मंच पर दो पात्र नज़र आते हैं। एक धर्महै तो दूसरा विज्ञान । विज्ञान के हाथों में मिसाइल है। धर्म के हाथों में ध्वज है। ]
विज्ञान-हा हा हा ...मै कितना ताकतवर हूँ। आज पूरी दुनिया मेरे चरणों में नत-मस्तक है। चारों तरफ मेरा ही परचम लहरा रहा है।
धर्म -मगर मेरे भाई ,मेरे बिना तुम्हारा क्या मूल्य है?बिना धर्म के विज्ञान अँधा है।
विज्ञान-हा हा हा ही ही ही ...क्या बात करते हो धर्म ;आज तो बस मेरा ही राज है। तुम्हें आज पूछता कौन है?मेरी मानो और किताबों के पन्नों में दुबक कर बैठ जाओ।
धर्म-अरे भाई विज्ञान,इतना अहंकार भी कोई काम का नहीं। धर्मका महत्त्व कभी कम नहीं होता। मैने युगों -युगों से दुनिया को राह दिखाई है।
विज्ञान-राह दिखाई है या लोगों को भीरु बनाया है?राह दिखाने का काम तो मेरा है। मैंने पूरी दुनिया का स्वरुप ही बदल डाला है। आज जिधर देखो उधर विज्ञान ही विज्ञान नजर आता है। धर्म को पूछता कौन है मेरे भाई।
धर्म-मैंने लोगों को सोचना सिखाया,कल्याण का मार्ग दिखाया,दया,करुणा आदि मूल्य सिखाये।
विज्ञान-कल्याण!अरे भाई धर्म तुम्हें जरूर गलतफहमी हुई है। कल्याण तो सारा विज्ञान ने किया है। आज यातायात,चिकित्सा,संचार,खान-पान आदि सभी कुछ तो मेरी देन है।
धर्म-और परमाणु बम भी तो तुम्ही ने दिया है। तुम देते जरूर हो मगर तुम्हारे पास जो सबसे बड़ी कमी है वो है विवेक की कमी।तुम लोगों को भौतिक रूप से समृद्ध कर दोगे किन्तु मानवीय मूल्य तो धर्म ही दे सकता है।
विज्ञान-क्यों इतराते हो?आज मानवीय मूल्यों को पूछता कौन है?
धर्म-मत पूछो,मुझे क्या। नहीं पूछने का परिणाम तो तुम देख ही रहे होंगे। आज चारों ओर हिंसा,मारकाट,बलात्कार,लूट आदि इन्ही मूल्यों के घटने का परिणाम है।और धर्म ही इसकी दिशा बदल सकता है।
विज्ञान-शायद तुम्हारी बात ठीक हो पर आज आदमी के पास इन सब फालतू की बातों के लिए वक़्त नहीं है।
धर्म-भाई विज्ञान,जरा ठण्डे दिमाग से सोचो। तुमने परमाणु के बम तो बना दिए,पर यदि किसी दिन इनका उपयोग हो गया तो .....तो क्या होगा?सोचा है कभी?फिर जब सारी दुनिया ही मिट गयी तो कौन राजा और कौन प्रजा?
विज्ञान-फिर तुम्ही बताओ मुझे क्या करना चाहिए?
धर्म-तुम निराश मत हो ओ । मेरे साथ हाथ मिलाओ। हम दोनों मिलकर मानवता को बचा सकते हैं। [विज्ञान आगे बढ़ता है,धर्म के साथ हाथ मिलाता है। ]
धर्म और विज्ञान-[एक साथ]हम दोनों साथ मिलकर मानवता की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। आओ मनुष्यों हमारे साथ मिलकर इस पुनीत संकल्प को सफल बनाओ।
[धीरे -धीरे पर्दा गिरता है.]