प्रशंसा सभी को सुहाती है मगर जब प्रशंसा करने का अवसर आता है तो हम कंजूस क्यों बन जाते हैंा जहॉं मौका आये खुले दिल से प्रशंसा कर देनी चाहिए पर झूठी कभी न हो बॉस की झूठी प्रशंसा करते जीभ कांपती क्यों नहीं
पत्नी ने बडे प्रेम से आपके लिए सब्जी बनाई मगर आपका ध्यान तो मोबाइल में था
बच्चा अपनी अंकतालिका दिखाने आया पर हम तो जरुरी फाइल में उलझे थे जब जरुरत हो तो चूक जाते हैं फिर से सोचें
No comments:
Post a Comment