Monday, May 10, 2010

चिट्ठी बापू को

बापू माफ़ करना,मैंने तुम्हे बहुत देर से समझा है। मै कभी तुमसे सहमत नहीं रहा और सदा विरोध करता था। अब समझ में आ रहा है कि तब मेरी समझ का स्तर कितना नीचा था। अभी भी तुम्हें समझने में बहुत समय लगेगा पर संतोष है कि सही दिशा तो मिली। विश्वनाथ भाटी ,तारानगर[चुरू]

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