लघुकथा
बेवफा
एक बार एक चिड़े ने चिड़ी से कहा,"मैं तुमसे कभी दूर नहीं होना चाहता हूँ. तुम मुझे छोड़कर कहीं उड़ मत जाना."
चिड़ी बोली,"यदि उड़ जाऊं तो तुम मुझे पकड़ लेना."
"पकड़ तो तुम्हे लूँगा मगर इस तरह मैं तुम्हें पा नहीं सकता."चिड़े ने रुआंसा होते हुए कहा.
तभी चिड़िया ने अपने सभी पंख नोच डाले और बोली,"लो अब मैं तुम्हारी हो चुकी.अब मैं कभी तुम्हें छोड़कर नहीं जा सकती." एक दिन जोरदार तूफ़ान उमड़ा.चिड़िया ने कहा,"मैं तो उड़ नहीं सकती पर तुम तो उड़ कर अपने प्राण बचा लो."
चिड़ा बोला ,"ठीक है,मगर तुम अपना ख़याल रखना." कहा कर वह उड़ गया.
तूफ़ान रुकने के बाद उसने आकर देखा ,चिड़िया मर चुकी थी.
वृक्ष की एक डाली पर खून से लिखा था,"काश!वो एक बार तो कहता कि मैं तुम्हें अकेली छोड़कर नहीं जा सकता.यदि वह ऐसा कर लेता तो कम से कम मैं तूफ़ान आने से पहले तो नहीं मरती."प्रस्तुति -विश्वनाथ भाटी ,तारानगर ९४१३८८८२०९

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