Friday, November 19, 2010

माता कुमाता नहीं हो सकती .

                    एक माता-पिता ८-१० पुत्रों का पालन-पोषण करके भी चेहरे पर शिकन नहीं लाते मगर ८-१० पुत्र मिलकर भी माँ-बाप की सेवा नहीं कर पाते.संतान के लिए माँ-बाप भार क्यों बन जाते हैं? क्या माँगते हैं ये. बस प्यार के दो बोल.जरा से प्यार से बोल दो,पिघल जायेंगे.उनके दिल को जीतने का प्रयास करें तो दुनिया की सारी खुशियाँ आपकी झोली में होंगी.माँ-बाप समस्त तीर्थों से बढकर हैं.पूत कपूत हो सकता है मगर माता कुमाता नहीं हो सकती .
                                                                                   विश्वनाथ भाटी ,तारानगर.

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