Wednesday, October 13, 2010

शुभ-शुभ बोलो

                         व्यक्ति जैसा सोचता और करता है वह वैसा ही बन जाता है.हमारा अवचेतन मन हमारे द्वारा सोचे गये ,बोले गये ,देखे गये  को अपने भीतर जमा करता रहता है.यदि बुरा बोला तो बुराई जमा हुई और अच्छा बोला बोला तो अच्छाई जमा होगी.अवचेतन मन सोचने का काम खुद नहीं करता . हमारे द्वारा भरी गयी समस्त सूचनाएँ ही उसका आधार बनती है.हम चाहते तो कुछ और है मगर अवचेतन मन को देने वाली सूचनाओं की तरफ से बेखबर रहते हैं.इसी बात के कारण हमारे बड़े-बुजुर्ग सदा से यही कहते रहें है कि "सदा शुभ-शुभ बोलो ."आओ विचार करें कि हमारे द्वारा बोला गया हर वाक्य हरबार सकारात्मक ही हो.

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