Friday, April 16, 2010

कविता

१
तेरे लिए कहते,सुनते
खरी या खोटी ,
वाह री रोटी।

२
मम्मी की झिडकी
बेचारी लड़की
३
लंका
सोने की थी
तभी तो
कुम्भकरण जैसे लोग
सोये रहते थे।
४
क्या कहूँ मैं
इस कमी को
पी रही है शराब
आदमी को।


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