Friday, April 16, 2010

कविता


तेरे लिए कहते,सुनते
खरी या खोटी ,
वाह री रोटी।


मम्मी की झिडकी
बेचारी लड़की

लंका
सोने की थी
तभी तो
कुम्भकरण जैसे लोग
सोये रहते थे

क्या कहूँ मैं
इस कमी को
पी रही है शराब
आदमी को


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