
इन दिनों क्या आपने ध्यान दिया कि दूध के लिए पशुपालन से लोग कतराते हैं। कुछ हद तक सही भी है ,क्योंकि पशुपालन करना बहुत मुश्किल हो गया है। उनके लिए चारे की समस्या सबसे मोटी है। क्या करना है पशु रख कर। दूध मोल ले लेंगे । रोजाना की दूध की बन्धीवाला आधा किलो दूध अतिरिक्त नहीं दे सकता। फिर विवाह शादी में जितना मर्जी दूध,मावा,छन्ना कहाँ से आजाता है। आये दिन सिंथेटिक दूध के समाचार जानने को मिलते रहते हैं। क्या इस तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए?बेचारी गाय दर दर की मोहताज़ हो गयी।आओ कुछ सकारात्मक कदम उठायें.
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