Thursday, August 19, 2010

आजकल

आजकल बच्‍चे मिठाई से कतराते हैं। उन्‍हें चाहिए कुरकुरे भुजिया समोसे या शीतल पेय।एक वो जमाना था जब हमें थोडे से गुड के लिए बहुत पापड बेलने पडते थे। बर्फवाले लच्‍छे के लिए तो कितनी सारी शर्तें भी माननी पडती थीं। दिवाली या होली का बेसब्री से इन्‍तजार करते रहते थे। चीनी के डिब्‍बे से मां की नजरें बचाकर थोडी सी चीनी चुराने में बहुत मजा  आता था। कभी कभी तो शिकायत हो जाने से मजा किरकिरा भी हो जाता था। रसगुल्‍ले के लिए तो कहते थे कि ये चाहे 100 खालो पर पेट तो भरेगा नहीं। जमाना बदल रहा है।

No comments: