Saturday, May 1, 2010

नमन

देश की मिटटी में जन्मे और इसी में मिल गए,
कीर्ति सौरभ लुटातेफिर सुमन से खिल गए,
आज कैसा लहलहाता ,चमचमाता यह चमन ,
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन।
आस्था हर श्वांश में थी ,लक्ष्य ले बढ़ते कदम
बेड़िया लाख मात तेरी ,प्राण -अंतर में घुटा दम
ऐसी सुसंतान पा कर मुस्कराया यह वतन
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन।
प्राण का दीपक जलाया ,आरती कण -कण सजी
माते तुम्हारी वंदना में ,श्वांश की झांझर बजी
बल दो की अर्पण कर सकूँ ,चरणों में तेरे सर सुमन
अमर शहीदों को नमन
उन वीर सिंहों को नमन ।
विश्वनाथ भाटी,तारानगर ,चुरू

No comments: