Saturday, November 13, 2010

माँ

                               माँ  
माँ ने जन्म दिया,
पाला-पोसा ,
माँ ने खुद गीले में सो कर सूखे में सुलाया,
माँ ने तुतला-तुतला कर बोलना सिखाया,
माँ ने डगमगाते कदमों को उंगली का सहारा दिया,
माँ ने रात-रातभर जागकर हमारी नींद को संजोया ,
माँ ने आँचल की ओट से दुनिया के ह बुरे साये को दूर रखा,
माँ ने बहू-बेटे की आरती उतारी,
बेटा अपनी दुनिया में खो गया,
समझदार जो हो गया है,
तरस गयी ममता, 
बरस गयी आँखे,
नहीं है समय जीवनदात्री के लिए,
व्यापार भी तो करना है .
माँ दिल से सोचती है,
बेटा दिमाग से.
                           रचयिता-      विश्वनाथ भाटी,तारानगर

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