Sunday, March 21, 2010

दुनिया तेज गति से चल रही है। हमें दुनिया के साथ चलना है तो अपने क़दमों की गति बढानी पड़ेगी। दुनिया के साथ बढ़ते हुए आगे चलना कितना अच्छा लगता है। कोई आगे निकल जाता है तो अपने कदम तेज कर दो । दुनिया रोनेवालों का साथ नहीं देती। यदि हम हंसेंगें तो दुनिया हमारे साथ हँसेंगी ;पर यदि रोयेंगे तो हमें अकेले रोना पड़ेगा।
विश्वनाथ भाटी तारानगर

1 comment:

दुलाराम सहारण said...

सकारात्‍मक दृष्टिकोण।


चरवैति चरवैति