उठा था ख्याल दिल में कि याद ऐ खुदा करेंगे, मगर फिर याद आया की रोटी नहीं मिली तो क्या करेंगे।
वक़्त का कटु सत्य। जिसके पास चने है उसके पास चबाने के लिए दाँत नहीं और दाँत वाले चनों का इंतजार करते रह जाते हैं। समानता का नारा दिया जाता है पर समाज की जटिलता ही ऐसी है कि इसे स्थापित नहीं किया जा रहा।
कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू ......... । विश्वनाथ भाटी,तारानगर
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