Friday, August 20, 2010

वो पल

जरुरत के मुताबिक जिन्‍दगी जीयो; ख्‍वाहिश के मुताबिक नहीं क्‍योंकि जरूरत फकीर की भी पूरी हो जाती है मगर ख्‍वाहिश बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है।

Don't worry if others do not underrstand you.Worry if you cann't understand yourself.

Locks are never manufactured without a key.Similarly God never gives problems without solutions.All we need is to have patience to unlock them.
पूरी दुनिया की सबसे खूबसूरत जोडी;;;; मुस्‍कराहट और आंसू 
दोनों का एक साथ मिलना मुश्किल है लेकिन जब ये दोनों मिलते हैं तो वो पल सबसे खूबसूरत होता है।

GIRL

                              GIRL
      A girl is like a bird....
      God's most prettiest creation in the world....
      The childhood of girls is their golden age...
      After that ,the world keeps them in a beautiful cage...
      This innocent creature,looks like a fairy,
      Who losses her feather when she marries...
      She leads all her life in serving others..

      She also has a heart ,But none bothers..
      A dress of happiness and pleasure she wears..
      But in every corner ,you find a girl shedding tears....
      TRY TO GIVE GIRLS THE DUE RESPECT THAT THEY DESERVE....

तब नैना कछु और थे अब नैना कछु और

                        समाज में रहते हुए अनेक बार अपनी जरूरत के लिए दूसरों क‍ी मदद लेनी पडती है। रही बात रुपयों पैसों के लेनदेन की सो अधिक पैसेवाला हो या कम पैसोंवाला सबको ही जरुरत पडती रहती है।इस विषय में जो विचारणीय बात है वह यह कि तब नैना कछु और थे अब नैना कछु और अर्थात्‍ा जरुरत पडने और जरुरत पूरी होने के बाद नैन पलट जाते हैं। मेरे भाई साहब ने बताया कि व्‍यवहार कमाना पडता है। लेने के समय किया गया वादा देने के वक्‍त भी याद रहना चाहिए। वादा करते समय अपनी क्षमता का आकलन कर लेना अच्‍छा रहता है। वादे पर खरा उतर कर अपना व्‍यवहार बना रह जाता है। यदि मजबूरी हो भी जाए तो उस व्‍यक्ति को छोडकर बाकी पूरी दुनिया आपके सामने है। इससे उस व्‍यक्ति के सामने हमारा वचन खडा रह जाता है। एक बार आजमा कर तो देख लीजिए।    विश्‍वनाथ भाटी तारानगर

Thursday, August 19, 2010

आजकल

आजकल बच्‍चे मिठाई से कतराते हैं। उन्‍हें चाहिए कुरकुरे भुजिया समोसे या शीतल पेय।एक वो जमाना था जब हमें थोडे से गुड के लिए बहुत पापड बेलने पडते थे। बर्फवाले लच्‍छे के लिए तो कितनी सारी शर्तें भी माननी पडती थीं। दिवाली या होली का बेसब्री से इन्‍तजार करते रहते थे। चीनी के डिब्‍बे से मां की नजरें बचाकर थोडी सी चीनी चुराने में बहुत मजा  आता था। कभी कभी तो शिकायत हो जाने से मजा किरकिरा भी हो जाता था। रसगुल्‍ले के लिए तो कहते थे कि ये चाहे 100 खालो पर पेट तो भरेगा नहीं। जमाना बदल रहा है।

प्रशंसा

प्रशंसा सभी को सुहाती है मगर जब प्रशंसा करने का अवसर आता है तो हम कंजूस क्‍यों बन जाते हैंा जहॉं मौ‍का आये खुले दिल से प्रशंसा कर देनी चाहिए पर झूठी कभी न हो
बॉस की झूठी प्रशंसा करते जीभ कांपती क्‍यों नहीं
पत्‍नी ने बडे प्रेम से आपके लिए सब्‍जी बनाई मगर आपका ध्‍यान तो मोबाइल में था 
बच्‍चा अपनी अंकतालिका दिखाने आया पर हम तो जरुरी फाइल में उलझे थे
जब जरुरत हो तो चूक जाते हैं 
फिर से सोचें

Monday, August 9, 2010

क्षणिकाएं

तेरे लिए कहते सुनते 
खरी या खोटी
वाह री रोटी .
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मम्मी की झिडकी 
बेचारी लड़की 
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Sunday, August 1, 2010

संविधान द्वारा मान्यता

राजस्थान प्रान्त एक बहुत बड़ा राज्य है. राजस्थान के लोग अपनी राजस्थानी भाषा में बोलते हैं. राजस्थानी भाषा की मारवाड़ी,मेवाड़ी,मेवाती,हाडोती आदि बोलियाँ है और विशाल साहित्य भण्डार भरा है, मगर करोड़ों लोगो की इस भाषा को अभी तक संविधान द्वारा मान्यता नहीं दी गयी है. इस भाषा को मान्यता मिलने से राजस्थान के लोगों को अपनी जबान मिल सकेगी.